शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

" वो नाम एक.........."


लिखो कुछ .... उसने कहा।
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लिखा तो कितनी बार
वो नाम एक
मिटाया कितनी बार
वो नाम एक
महक जाती हैं
अंगुलियाँ मेरी
जब जब लिखता
वो नाम एक
मन्त्र सुना तो नही
मन्त्र पढ़ा भी नही
पर मन्त्र तो है
वो नाम एक
गुनगुनाता हूँ जब
वो नाम एक
जादू सा होता है
सिहरता हूँ
मचलता हूँ
नाच सा उठता हूँ
लिखना आसां नही होता
अब वो नाम एक
रात ही सुबह हो जाये
नींद स्याही बन जाये
वो मिटाया करे
मैं लिखता ही रहूं
वो नाम एक
वो प्यार एक।

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